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राजभाषा संवैधानिक स्थिति

संघ की राजभाषा नीति, राजभाषा अधिनियम, राजभाषा नियम, विभागीय परीक्षा प्रश्न, वार्षिक कार्यक्रम 2026-27, पुरस्कार और डिजिटल राजभाषा उपकरण का अद्यतन संदर्भ।

राजभाषा अधिनियम राजभाषा नियम विभागीय परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न वार्षिक कार्यक्रम 2026-27, पुरस्कार एवं डिजिटल राजभाषा उपकरण

राजभाषा पखवाड़ा 2026
अद्यतन संस्करण : 1 सितंबर 2026

संघ की राजभाषा नीति

राजभाषा के प्रयोग-प्रसार के संबंध में भारत के संविधान में अलग-अलग उपबंध हैं—

अनुच्छेद 343(1) में यह व्यवस्था है कि संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।

अनुच्छेद 343(2) में यह व्यवस्था है कि संविधान लागू होने के समय से 15 वर्ष की अवधि अर्थात 1965 तक उन शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए संविधान लागू होने से पहले किया जा रहा था।

परन्तु राष्ट्रपति इस अवधि में भी अर्थात 1965 से पहले भी आदेश निकाल कर किसी काम के लिए अंग्रेजी के अलावा हिन्दी का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेंगे। (राष्ट्रपति के आदेश 1952, 1955 एवं 1960 में जारी किये)

अनुच्छेद 344 (1) में यह व्यवस्था है कि संविधान के प्रारंभ से 5 वर्ष की समाप्ति पर और तत्पश्चात् ऐसे प्रारंभ से 10 वर्ष की समाप्ति पर राष्ट्रपति द्वारा एक आयोग की नियुक्ति की जाएगी जो अन्य बातों के साथ-साथ संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिन्दी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग तथा सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के बारे में सिफारिश करेगा। (आयोग की स्थापना 1955 में हुई और रिपोर्ट 1956 में प्राप्त हुई। इस पर 1956 में संसदीय समिति गठित की गई)।

अनुच्छेद 344(4) के तहत 30 सदस्यीय संसदीय समिति (लोकसभा के 20 तथा राज्यसभा के 10 सदस्य) का प्रावधान है। समिति आयोग की सिफारिशों की जांच कर राष्ट्रपति को अपनी राय देती है।

अनुच्छेद 345 में यह व्यवस्था है कि राज्य का विधान मंडल राज्य में प्रयोग होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिन्दी को अपने सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के रूप में अंगीकार कर सकेगा।

अनुच्छेद 348(1) के अनुसार संसद अन्यथा विधि न बनाए तब तक उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की कार्यवाही अंग्रेजी में होगी। अनुच्छेद 348(2) के तहत राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या राज्य की अन्य राजभाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकता है; यह अनुमति निर्णय, डिक्री या आदेश पर लागू नहीं होती।

अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का कर्तव्य है कि वह हिंदी का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे और उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे। गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग प्रतिवर्ष हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग के लिए वार्षिक कार्यक्रम जारी करता है।

1968 में संसद द्वारा एक संकल्प पारित किया गया जिसके अनुसार हिन्दी के उत्तरोतर प्रयोग हेतु एक अधिक गहन और व्यापक कार्यक्रम तैयार किया जाता है और प्रगति की विस्तृत वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जाती है।

अनुच्छेद 120(1) के अनुसार संसद का कार्य हिंदी या अंग्रेजी में किया जाता है; पीठासीन अधिकारी किसी सदस्य को मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकता है। राज्यों के विधान-मंडलों की भाषा का संबंधित उपबंध अनुच्छेद 210(1) में है।

राजभाषा अधिनियम

राजभाषा आयोग और संसदीय समिति की सिफ़ारिशों पर अमल करने की दृष्टि से 1963 में राजभाषा अधिनियम बनाया गया जिसमें 1967 में संशोधन किया गया। संशोधित राजभाषा अधिनियम के मुख्य उपबंध इस प्रकार हैं-

राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(1) के अनुसार 26 जनवरी 1965 के बाद भी संघ के उन शासकीय प्रयोजनों तथा संसद के कामकाज में हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी का प्रयोग जारी रह सकता है जिनमें वह पहले प्रयुक्त होती थी।

केंद्रीय सरकार और हिंदी को राजभाषा के रूप में न अपनाने वाले राज्यों के साथ पत्र व्यवहार अंग्रेजी में होगा, बशर्ते कि उस राज्य ने इसके लिए हिंदी के प्रयोग को स्वीकार न किया हो। इसी प्रकार हिंदी भाषी सरकारें भी उपर्युक्त राज्य सरकार के साथ अंग्रेजी में पत्र व्यवहार करेगी और यदि वे ऐसे राज्यों को पत्र हिंदी में भेजे तो उसके साथ अंग्रेजी अनुवाद भी भेजा जाएगा।

केंद्रीय सरकारी कार्यालयों आदि के बीच पत्र व्यवहार के लिए हिंदी अथवा अंग्रेजी का प्रयोग किया जा सकता है लेकिन जब तक संबंधित कार्यालयों के कर्मचारी हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं करते तब तक पत्र का दूसरी भाषा में अनुवाद उपलब्ध कराया जाता रहेगा।

राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत निम्नलिखित दस्तावेज हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी करना अनिवार्य है—

  1. संकल्प
  2. सामान्य आदेश
  3. नियम
  4. अधिसूचनाएं
  5. प्रशासनिक या अन्य रिपोर्ट और प्रेस-विज्ञप्तियां
  6. संसद के किसी सदन के समक्ष रखी प्रशासनिक या अन्य रिपोर्ट और राजकीय कागज-पत्र
  7. संविदाएं और करार
  8. अनुज्ञप्तियां और अनुज्ञापत्र
  9. सूचनाएं
  10. निविदा-प्ररूप

धारा 3(4) के अनुसार नियम बनाते समय कार्य के शीघ्र और दक्ष निपटान तथा जनसाधारण के हित का ध्यान रखा जाए; हिंदी या अंग्रेजी में प्रवीण कर्मचारी अपना कार्य प्रभावी रूप से कर सके और केवल दोनों भाषाओं में प्रवीण न होने के कारण उसका अहित न हो।

संशोधित अधिनियम में यह भी व्यवस्था है कि अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखने के बारे में यह व्यवस्था तब तक चलती रहेगी जब तक कि इसे समाप्त करने के लिए हिंदी के राजभाषा के रूप में न मानने वाले राज्यों के विधान मंडल संकल्प पास न करें और उसके बाद ऐसा कार्य करने के लिए संसद संकल्प पास न करें।

राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के तहत राजभाषा संबंधी 30 सदस्यीय संसदीय समिति (लोकसभा 20, राज्यसभा 10) के गठन का प्रावधान है। यह संघ के शासकीय प्रयोजनों में हिंदी के प्रयोग की प्रगति की समीक्षा कर राष्ट्रपति को रिपोर्ट देती है।

राजभाषा नियम, 1976 के नियम 8(1) के अनुसार कर्मचारी फाइल पर टिप्पणी या कार्यवृत्त हिंदी अथवा अंग्रेजी में लिख सकता है और उससे दूसरी भाषा में स्वयं अनुवाद देने की अपेक्षा नहीं की जाएगी। धारा 3(3) के निर्दिष्ट दस्तावेजों सहित जहां द्विभाषिकता अनिवार्य है, वहां दोनों भाषाओं का प्रयोग करना होगा।

राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976

(यथा संशोधित, 1987, 2007 तथा 2011)

सा.का.नि. 1052 --राजभाषा अधिनियम, 1963 (1963 का 19) की धारा 3 की उपधारा (4) के साथ पठित धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थातः-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ

(क) इन नियमों का संक्षिप्त नाम राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976 है।

(ख) इनका विस्तार, तमिलनाडु राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है।

(ग) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।

2. परिभाषाएँ

इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न होः-

(क) 'अधिनियम' से राजभाषा अधिनियम, 1963 (1963 का 19) अभिप्रेत है;

(ख) 'केन्द्रीय सरकार के कार्यालय' के अन्तर्गत निम्नलिखित भी है, अर्थातः-

(क) केन्द्रीय सरकार का कोई मंत्रालय, विभाग या कार्यालय;

(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किसी आयोग, समिति या अधिकरण का कोई कार्यालय; और

(ग) केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में या नियंत्रण के अधीन किसी निगम या कम्पनी का कोई कार्यालय;

(ग) 'कर्मचारी' से केन्द्रीय सरकार के कार्यालय में नियोजित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;

(घ) 'अधिसूचित कार्यालय' से नियम 10 के उपनियम (4) के अधीन अधिसूचित कार्यालय, अभिप्रेत है;

(ङ) 'हिन्दी में प्रवीणता' से नियम 9 में वर्णित प्रवीणता अभिप्रेत है ;

(च) 'क्षेत्र क' से बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्य तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र अभिप्रेत है;

(छ) 'क्षेत्र ख' से गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब राज्य तथा चंडीगढ़, दमण और दीव तथा दादरा और नगर हवेली संघ राज्य क्षेत्र अभिप्रेत हैं;

(ज) 'क्षेत्र ग' से खंड (च) और (छ) में निर्दिष्ट राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों से भिन्न राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र अभिप्रेत है;

(झ) 'हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान' से नियम 10 में वर्णित कार्यसाधक ज्ञान अभिप्रेत है ।

3. राज्यों आदि और केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों से भिन्न कार्यालयों के साथ पत्रादि

(1) केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से क्षेत्र 'क' में किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र को या ऐसे राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में किसी कार्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कार्यालय न हो) या व्यक्ति को पत्रादि असाधारण दशाओं को छोड़कर हिन्दी में होंगे और यदि उनमें से किसी को कोई पत्रादि अंग्रेजी में भेजे जाते हैं तो उनके साथ उनका हिन्दी अनुवाद भी भेजा जाएगा।

(2) केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से--

(क) क्षेत्र 'ख' में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में किसी कार्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कार्यालय न हो) को पत्रादि सामान्यतया हिन्दी में होंगे और यदि इनमें से किसी को कोई पत्रादि अंग्रेजी में भेजे जाते हैं तो उनके साथ उनका हिन्दी अनुवाद भी भेजा जाएगा परन्तु यदि कोई ऐसा राज्य या संघ राज्य क्षेत्र यह चाहता है कि किसी विशिष्ट वर्ग या प्रवर्ग के पत्रादि या उसके किसी कार्यालय के लिए आशयित पत्रादि संबद्ध राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि तक अंग्रेजी या हिन्दी में भेजे जाएं और उसके साथ दूसरी भाषा में उसका अनुवाद भी भेजा जाए तो ऐसे पत्रादि उसी रीति से भेजे जाएंगे ;

(ख) क्षेत्र 'ख' के किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में भेजे जा सकते हैं।

(3) केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से क्षेत्र 'ग' में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे राज्य में किसी कार्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कार्यालय न हो)या व्यक्ति को पत्रादि अंग्रेजी में होंगे।

(4) उप नियम (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, क्षेत्र 'ग' में केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से क्षेत्र 'क'या'ख'में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे राज्य में किसी कार्यालय (जो केन्द्रीय सरकार का कार्यालय न हो) या व्यक्ति को पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं । परन्तु हिन्दी में पत्रादि ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या,हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर अवधारित करे।

4. केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच पत्रादि

(क) केन्द्रीय सरकार के किसी एक मंत्रालय या विभाग और किसी दूसरे मंत्रालय या विभाग के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं;

(ख) केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग और क्षेत्र 'क' में स्थित संलग्न या अधीनस्थ कार्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी में होंगे और ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार, ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या, हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे संबंधित आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए, समय-समय पर अवधारित करे;

(ग) क्षेत्र 'क' में स्थित केन्द्रीय सरकार के ऐसे कार्यालयों के बीच, जो खण्ड (क) या खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट कार्यालयों से भिन्न हैं, पत्रादि हिन्दी में होंगे;

(घ) क्षेत्र 'क' में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों और क्षेत्र 'ख' या 'ग'में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं;

परन्तु ये पत्रादि हिन्दी में ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या,हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर अवधारित करे ;

(ङ) क्षेत्र 'ख' या 'ग' में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते हैं;

परन्तु ये पत्रादि हिन्दी में ऐसे अनुपात में होंगे जो केन्द्रीय सरकार ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या,हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे आनुषंगिक बातों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर अवधारित करे ;

परन्तु जहां ऐसे पत्रादि--

(i) क्षेत्र 'क' या क्षेत्र 'ख' किसी कार्यालय को संबोधित हैं वहां यदि आवश्यक हो तो, उनका दूसरी भाषा में अनुवाद, पत्रादि प्राप्त करने के स्थान पर किया जाएगा;

(ii) क्षेत्र 'ग' में किसी कार्यालय को संबोधित है वहां, उनका दूसरी भाषा में अनुवाद, उनके साथ भेजा जाएगा;

परन्तु यह और कि यदि कोई पत्रादि किसी अधिसूचित कार्यालय को संबोधित है तो दूसरी भाषा में ऐसा अनुवाद उपलब्ध कराने की अपेक्षा नहीं की जाएगी ।

5. हिन्दी में प्राप्त पत्रादि के उत्तर

नियम 3 और नियम 4 में किसी बात के होते हुए भी, हिन्दी में पत्रादि के उत्तर केन्द्रीय सरकार के कार्यालय से हिन्दी में दिए जाएंगे ।

6. हिन्दी और अंग्रेजी दोनों का प्रयोग

अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट सभी दस्तावेजों के लिए हिन्दी और अंग्रेजी दोनों का प्रयोग किया जाएगा और ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों का यह उत्तरदायित्व होगा कि वे यह सुनिश्चित कर लें कि ऐसी दस्तावेजें हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही में तैयार की जाती हैं, निष्पादित की जाती हैं और जारी की जाती हैं।

7. आवेदन, अभ्यावेदन आदि

(1) कोई कर्मचारी आवेदन, अपील या अभ्यावेदन हिन्दी या अंग्रेजी में कर सकता है।

(2) जब उपनियम (1) में विनिर्दिष्ट कोई आवेदन, अपील या अभ्यावेदन हिन्दी में किया गया हो या उस पर हिन्दी में हस्ताक्षर किए गए हों, तब उसका उत्तर हिन्दी में दिया जाएगा।

(3) यदि कोई कर्मचारी यह चाहता है कि सेवा संबंधी विषयों (जिनके अन्तर्गत अनुशासनिक कार्यवाहियां भी हैं) से संबंधित कोई आदेश या सूचना,जिसका कर्मचारी पर तामील किया जाना अपेक्षित है, यथास्थिति, हिन्दी या अंग्रेजी में होनी चाहिए तो वह उसे असम्यक् विलम्ब के बिना उसी भाषा में दी जाएगी।

8. केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों में टिप्पणियों का लिखा जाना

(1) कोई कर्मचारी किसी फाइल पर टिप्पण या कार्यवृत्त हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकता है और उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह उसका अनुवाद दूसरी भाषा में प्रस्तुत करे।

(2) केन्द्रीय सरकार का कोई भी कर्मचारी, जो हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखता है, हिन्दी में किसी दस्तावेज के अंग्रेजी अनुवाद की मांग तभी कर सकता है, जब वह दस्तावेज विधिक या तकनीकी प्रकृति का है, अन्यथा नहीं।

(3) यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विशिष्ट दस्तावेज विधिक या तकनीकी प्रकृति का है या नहीं तो विभाग या कार्यालय का प्रधान उसका विनिश्चय करेगा।

(4) उपनियम (1) में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा ऐसे अधिसूचित कार्यालयों को विनिर्दिष्ट कर सकती है जहां ऐसे कर्मचारियों द्वारा,जिन्हें हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त है, टिप्पण, प्रारूपण और ऐसे अन्य शासकीय प्रयोजनों के लिए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, केवल हिन्दी का प्रयोग किया जाएगा ।

9. हिन्दी में प्रवीणता

यदि किसी कर्मचारी ने-

(क) मैट्रिक परीक्षा या उसकी समतुल्य या उससे उच्चतर कोई परीक्षा हिन्दी के माध्यम से उत्तीर्ण कर ली है;या

(ख) स्नातक परीक्षा में अथवा स्नातक परीक्षा की समतुल्य या उससे उच्चतर किसी अन्य परीक्षा में हिन्दी को एक वैकल्पिक विषय के रूप में लिया हो; या

(ग) यदि वह इन नियमों से उपाबद्ध प्ररूप में यह घोषणा करता है कि उसे हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त है;

तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त कर ली है ।

10. हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान

(1) (क) यदि किसी कर्मचारी ने-

(i) मैट्रिक परीक्षा या उसकी समतुल्य या उससे उच्चतर परीक्षा हिन्दी विषय के साथ उत्तीर्ण कर ली है; या

(ii) केन्द्रीय सरकार की हिन्दी परीक्षा योजना के अन्तर्गत आयोजित प्राज्ञ परीक्षा या यदि उस सरकार द्वारा किसी विशिष्ट प्रवर्ग के पदों के सम्बन्ध में उस योजना के अन्तर्गत कोई निम्नतर परीक्षा विनिर्दिष्ट है, वह परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है;या

(iii) केन्द्रीय सरकार द्वारा उस निमित्त विनिर्दिष्ट कोई अन्य परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है; या

(ख) यदि वह इन नियमों से उपाबद्ध प्ररूप में यह घोषणा करता है कि उसने ऐसा ज्ञान प्राप्त कर लिया है;

तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है।

(2) यदि केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय में कार्य करने वाले कर्मचारियों में से अस्सी प्रतिशत ने हिन्दी का ऐसा ज्ञान प्राप्त कर लिया है तो उस कार्यालय के कर्मचारियों के बारे में सामान्यतया यह समझा जाएगा कि उन्होंने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है।

(3) केन्द्रीय सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट कोई अधिकारी यह अवधारित कर सकता है कि केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय के कर्मचारियों ने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है या नहीं।

(4) केन्द्रीय सरकार के जिन कार्यालयों में कर्मचारियों ने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है उन कार्यालयों के नाम राजपत्र में अधिसूचित किए जाएंगे;

परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार की राय है कि किसी अधिसूचित कार्यालय में काम करने वाले और हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले कर्मचारियों का प्रतिशत किसी तारीख में से उपनियम (2) में विनिर्दिष्ट प्रतिशत से कम हो गया है, तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकती है कि उक्त कार्यालय उस तारीख से अधिसूचित कार्यालय नहीं रह जाएगा ।

11. मैनुअल, संहिताएं, प्रक्रिया संबंधी अन्य साहित्य, लेखन सामग्री आदि

(1) केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों से संबंधित सभी मैनुअल, संहिताएं और प्रक्रिया संबंधी अन्य साहित्य, हिन्दी और अंग्रेजी में द्विभाषिक रूप में यथास्थिति, मुद्रित या साइक्लोस्टाइल किया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा।

(2) केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय में प्रयोग किए जाने वाले रजिस्टरों के प्ररूप और शीर्षक हिन्दी और अंग्रेजी में होंगे।

(3) केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय में प्रयोग के लिए सभी नामपट्ट, सूचना पट्ट, पत्रशीर्ष और लिफाफों पर उत्कीर्ण लेख तथा लेखन सामग्री की अन्य मदें हिन्दी और अंग्रेजी में लिखी जाएंगी, मुद्रित या उत्कीर्ण होंगी;

परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार ऐसा करना आवश्यक समझती है तो वह, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, केन्द्रीय सरकार के किसी कार्यालय को इस नियम के सभी या किन्हीं उपबन्धों से छूट दे सकती है।

12. अनुपालन का उत्तरदायित्व

(1) केन्द्रीय सरकार के प्रत्येक कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह--

(i) यह सुनिश्चित करे कि अधिनियम और इन नियमों के उपबंधों और उपनियम (2) के अधीन जारी किए गए निदेशों का समुचित रूप से अनुपालन हो रहा है;और

(ii) इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त और प्रभावकारी जांच के लिए उपाय करे ।

(2) केन्द्रीय सरकार अधिनियम और इन नियमों के उपबन्धों के सम्यक अनुपालन के लिए अपने कर्मचारियों और कार्यालयों को समय-समय पर आवश्यक निदेश जारी कर सकती है ।

वार्षिक कार्यक्रम 2026-27 : क्षेत्र ‘क’ के मुख्य लक्ष्य

बीकानेर/राजस्थान क्षेत्र ‘क’ में है। नीचे गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के 2026-27 वार्षिक कार्यक्रम के मुख्य कार्यालयी लक्ष्य दिए हैं। [स्रोत 2]

क्षेत्र ‘क’ के मुख्य कार्यालयी लक्ष्य, 2026-27
मद 2026-27 लक्ष्य
मूल पत्राचार/ई-मेल क→क 100%; क→ख 100%; क→ग 70%; क/ख स्थित कार्यालय या व्यक्ति 100%
हिंदी में प्राप्त पत्रों का उत्तर 100% हिंदी में
फाइलों पर हिंदी टिप्पण 80%
हिंदी माध्यम से प्रशिक्षण 75%
हिंदी टंकण/आशुलिपि पदों का उपयोग 80%
हिंदी डिक्टेशन/सीधा की-बोर्ड टंकण 70%
भाषा, टंकण और आशुलिपि प्रशिक्षण 100%
द्विभाषी प्रशिक्षण सामग्री 100%
पुस्तकालय व्यय पत्रिकाओं/मानक संदर्भ को छोड़कर अनुदान का 50% हिंदी पुस्तक/डिजिटल सामग्री/अनुवाद पर
द्विभाषी सुविधा वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 100%
द्विभाषी वेबसाइट 100%
नागरिक चार्टर/जनसूचना बोर्ड 100% द्विभाषी
राजभाषा निरीक्षण कम-से-कम 30% कार्यालय
समितियों की बैठक कार्यालय राजभाषा समिति 4; नगर राजभाषा समिति 2; हिंदी सलाहकार समिति 2 प्रति वर्ष
कोड/मैनुअल/फॉर्म/प्रक्रिया साहित्य 100% अनुवाद/द्विभाषी उपलब्धता
पूरा कार्य हिंदी में करने वाले अनुभाग 45%

नोट: नियम 12 किसी स्थायी ‘रोनियो/फैक्स’ सूची को अनिवार्य नहीं करता; प्रशासनिक प्रधान वर्तमान डिजिटल कार्यप्रवाह के अनुसार प्रभावकारी जांच-बिंदु तय करता है।

राजभाषा संबंधी कुछ प्रश्न और उनके उत्तर

विभागीय परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को पढ़ने के लिए प्रश्न पर क्लिक करें।

1. राजभाषा नीति को लागू करने की दृष्टि से भारत को कितने क्षेत्रों में बांटा गया है? प्रत्येक क्षेत्र में स्थित राज्यों के नाम लिखें।

राजभाषा नियमों के अनुपालन की दृष्टि से भारतीय भू-भाग को तीन क्षेत्रों—‘क’, ‘ख’ और ‘ग’—में बांटा गया है:

(क) क्षेत्र ‘क’: बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश; तथा अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली।

(ख) क्षेत्र ‘ख’: गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब; तथा चंडीगढ़ और वर्तमान संघ राज्य क्षेत्र ‘दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव’। नियमों के 2011 पाठ में इसके पूर्ववर्ती नाम अलग-अलग हैं।

(ग) क्षेत्र ‘ग’: क्षेत्र ‘क’ और ‘ख’ में शामिल राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से भिन्न राज्य और संघ राज्य क्षेत्र।

2. हिंदी व अहिंदीभाषी राज्यों में सूचना पट्ट/नामपट्ट आदि के लिए भाषाओं को किस क्रम से लिखा जाता है?

हिंदी भाषी राज्यों में सूचना पट्ट/नामपट्ट आदि के लिए भाषाओं का क्रम है:

हिंदीभाषी राज्यों में हिंदी पहले और अंग्रेजी बाद में।

अहिंदीभाषी राज्यों में पहले स्थानीय भाषा, फिर हिंदी और उसके बाद अंग्रेजी।

3. सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग निर्धारित लक्ष्यानुसार सुनिश्चित करने के लिए चैक प्वॉइंट कहां-कहां स्थापित किए गए हैं?

नियम 12 के अनुसार प्रशासनिक प्रधान उपयुक्त और प्रभावकारी जांच-उपाय निर्धारित करता है। इसलिए जांच-बिंदु वर्तमान कार्यालयी आदेश और ई-ऑफिस/डिजिटल कार्यप्रवाह के अनुसार होंगे; रोनियो, तारघर या फैक्स की कोई सार्वभौमिक स्थायी सूची नियम में नहीं है।

4. हिंदी शिक्षण योजना के अंतर्गत कर्मचारियों के लिए कौन-कौन सी परीक्षा निर्धारित है और उनका शैक्षिक स्तर क्या है?

केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान के चार मुख्य भाषा पाठ्यक्रम हैं:

प्रबोध — प्रारंभिक/प्राथमिक स्तर का कार्यसाधक पाठ्यक्रम।

प्रवीण — मध्य स्तर का पाठ्यक्रम।

प्राज्ञ — उच्च/हाई-स्कूल स्तर का पाठ्यक्रम। परांगत — स्नातक स्तर का उन्नत पाठ्यक्रम। इसके अतिरिक्त हिंदी शब्द-संसाधन/टंकण और हिंदी आशुलिपि प्रशिक्षण भी संचालित हैं।

5. निर्धारित हिंदी परीक्षा पास करने पर किसी कर्मचारी को क्या-क्या प्रोत्साहन मिलते हैं?

पात्र कर्मचारी को अधिसूचित परीक्षा, प्राप्तांक और अन्य शर्तों के अनुसार नकद पुरस्कार तथा/अथवा निर्धारित अवधि का वैयक्तिक वेतन मिल सकता है। 1 जुलाई 2025 से संशोधित नकद दरें इस पुस्तिका की पुरस्कार तालिका में हैं; पात्रता केवल परीक्षा पास करने से स्वतः नहीं बनती।

6. क्या हिंदी भाषी कर्मचारियों को भी प्रबोध, प्रवीण तथा प्राज्ञ परीक्षा पास करने पर कोई प्रोत्साहन देय है?

इसका उत्तर केवल ‘हिंदी भाषी/अहिंदी भाषी’ के आधार पर नहीं दिया जा सकता। मातृभाषा/घोषित निवास, पद, पहले से प्राप्त शैक्षिक योग्यता, पाठ्यक्रम और वर्तमान आदेश की शर्तें लागू होती हैं। संबंधित प्रशिक्षण कार्यालय से पात्रता प्रमाणित कराएं।

7. राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन किस-किस स्तर पर किया गया है? इन समितियों की बैठक कितने समय बाद होती है?

मंत्रालय/विभाग, मुख्यालय, मंडल, कारखाना तथा कार्यालय स्तर पर राजभाषा कार्यान्वयन समितियां बनती हैं। 2026-27 लक्ष्य के अनुसार कार्यालय राजभाषा समिति की चार त्रैमासिक और नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की दो अर्धवार्षिक बैठकें अपेक्षित हैं।

8. राजभाषा कार्यान्वयन समितियां गठित करने का क्या उद्देश्य है?

राजभाषा कार्यान्वयन समितियां गठित करने का उद्देश्य राजभाषा के प्रयोग-प्रसार की समीक्षा करना तथा कमियों को दूर करने के उपाय करना है।

9. हिंदी सप्ताह क्यों मनाया जाता है?

सरकारी कामकाज में राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रति जागरूकता तथा इसके उत्तरोतर प्रयोग में गति लाने तथा हिंदी भाषा के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने के उद्देश्य से हिंदी सप्ताह मनाया जाता है जिसमें राजभाषा प्रदर्शनी, विचार गोष्ठी, काव्य गोष्ठी तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

10. कर्मचारियों को सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कौन-कौन सी पुरस्कार योजना लागू की गई है?

रेलवे में हिंदी प्रशिक्षण/टंकण/आशुलिपि प्रोत्साहन, क्षेत्रीय व अखिल रेल निबंध-वाक्-टिप्पण प्रतियोगिताएं, रेल मंत्री हिंदी निबंध, रेलवे बोर्ड व्यक्तिगत नकद पुरस्कार, मौलिक हिंदी कार्य/डिक्टेशन, पुस्तक-लेखन, यात्रा-वृत्तांत, पदक और नाट्य-प्रतियोगिता सहित योजनाएं लागू हैं। वर्तमान दरों और स्रोत-सीमा के लिए आगे की पुरस्कार तालिकाएं देखें।

11. राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्रकार के कागजातों के नाम लिखे। यह भी उल्लेख करें कि नियमानुसार उक्त कागजात को अनिवार्यतः किस भाषा में जारी किया जाना चाहिए।

धारा 3(3) में संकल्प, सामान्य आदेश, नियम, अधिसूचनाएं, प्रशासनिक/अन्य रिपोर्ट व प्रेस-विज्ञप्तियां; संसद के समक्ष रखे राजकीय कागज-पत्र; संविदाएं/करार; अनुज्ञप्तियां/अनुज्ञापत्र; सूचनाएं और निविदा-प्ररूप आते हैं।

इन दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में जारी करना अनिवार्य है।

हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी दोनों भाषाओं के पाठ की उपलब्धता और समान आशय के लिए उत्तरदायी है।

12. हिंदी में कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर्मचारियों से क्या अभिप्राय है?

नियम 10 के अनुसार कर्मचारी को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान तब माना जाता है जब उसने मैट्रिक या समकक्ष/उच्चतर परीक्षा हिंदी विषय के साथ पास की हो; या हिंदी शिक्षण योजना की प्रवीण परीक्षा (अथवा पद के लिए विनिर्दिष्ट निम्नतर परीक्षा) पास की हो; या निर्धारित प्रपत्र में कार्यसाधक ज्ञान की घोषणा की हो।

कार्यसाधक ज्ञान और ‘हिंदी में प्रवीणता’ अलग कानूनी कसौटियां हैं।

13. हिंदी में प्रवीणता से क्या अभिप्राय है?

नियम 9 के अनुसार प्रवीणता तब मानी जाती है जब कर्मचारी ने मैट्रिक या समकक्ष/उच्चतर परीक्षा हिंदी माध्यम से पास की हो; या स्नातक/समकक्ष/उच्चतर परीक्षा में हिंदी को वैकल्पिक विषय के रूप में लिया हो; या निर्धारित प्रपत्र में हिंदी में प्रवीणता की घोषणा की हो।

14. संविधान की अष्टम अनुसूची में उल्लिखित भाषाओं के नाम लिखें।

संविधान की आठवीं अनुसूची [अनुच्छेद 344(1) और 351] में आधिकारिक क्रम से 22 अनुसूचित भाषाएं हैं—

1. असमिया 2. बंगला 3. बोडो 4. डोगरी 5. गुजराती 6. हिन्दी 7. कन्नड़ 8. कश्मीरी 9. कोंकणी 10. मैथिली 11. मलयालम

12. मणिपुरी 13. मराठी 14. नेपाली 15. ओड़िया 16. पंजाबी 17. संस्कृत 18. संथाली 19. सिंधी 20. तमिल 21. तेलुगू 22. उर्दू

15. हिंदी दिवस कब मनाया जाता है और क्यों?

हिंदी दिवस प्रतिवर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है क्योंकि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। संबंधित संवैधानिक उपबंध 26 जनवरी 1950 को लागू हुए।

16. राजभाषा से क्या अभिप्राय है?

संघ द्वारा सरकारी कामकाज के लिए अंगीकार की गई भाषा को राजभाषा माना गया है। भारत सरकार ने राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया है जिसकी लिपि देवनागरी होगी तथा संघ के सरकारी प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।

17. केन्द्रीय हिंदी समिति का अध्यक्ष कौन होता है?

केन्द्रीय हिंदी समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।

18. राजभाषा नियमों के अनुसार किन-किन पत्रों/आवेदनों का उत्तर हिंदी में देना अनिवार्य है?

राजभाषा नियमों के अनुसार हिंदी में प्राप्त व हस्ताक्षरित पत्रों/आवेदनों का उत्तर हिंदी में देना अनिवार्य है।

19. यदि अधिकारी हिंदी में डिक्टेशन देते हैं तो उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप कितनी राशि देय है?

रेलवे की वर्तमान प्रकाशित योजना में पात्र अधिकारी को ₹5,000 का एकमुश्त पुरस्कार है। हिंदी भाषी अधिकारी के लिए वर्ष में कम-से-कम 20,000 और अहिंदी भाषी अधिकारी के लिए 10,000 शब्द हिंदी डिक्टेशन की शर्त है; आशुलिपिक की सुविधा होना भी आवश्यक है। [स्रोत 3]

20. राजभाषा नियमों के अन्तर्गत किस प्रकार के कार्यालय को अधिसूचित किया जा सकता है?

नियम 10(2) के अनुसार सामान्यतः 80% कर्मचारियों के कार्यसाधक ज्ञान पर कार्यालय को वह स्तर प्राप्त माना जा सकता है; पर अधिसूचित कार्यालय बनने के लिए नियम 10(3) के तहत सक्षम निर्धारण और नियम 10(4) के तहत राजपत्र में कार्यालय का नाम अधिसूचित होना भी आवश्यक है।

21. राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है?

‘राजभाषा’ वह भाषा है जिसे संघ या राज्य अपने सरकारी कामकाज के लिए विधि द्वारा अपनाता है। भारत के संविधान ने किसी भाषा को ‘राष्ट्रभाषा’ घोषित नहीं किया है। अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी संघ की राजभाषा है; अंग्रेजी का प्रयोग राजभाषा अधिनियम के अनुसार जारी है। अष्टम अनुसूची की 22 भाषाएं ‘अनुसूचित भाषाएं’ हैं, राष्ट्रभाषाएं नहीं।

22. भारतीय संविधान के अनुसार राजभाषा हिन्दी कब से लागू है?

संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया; संविधान के संबंधित उपबंध 26 जनवरी 1950 से लागू हुए। अतः ‘14 सितंबर 1949 से लागू’ कहना सटीक नहीं है।

23. अष्टम अनुसूची में किन-किन भाषाओं को बाद में जोड़ा गया है?

सिंधी—21वां संशोधन (1967); कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली—71वां संशोधन (1992); बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली—92वां संशोधन (2003)। 96वें संशोधन (2011) ने ‘उड़िया’ नाम बदलकर ‘ओड़िया’ किया।

पुरस्कार एवं प्रोत्साहन योजनाएं : 2026 संदर्भ

महत्वपूर्ण स्रोत-सीमा: रेलवे की राशियां उत्तर पश्चिम रेलवे के जुलाई 2024 तक अद्यतन आधिकारिक संकलन से सत्यापित हैं; 1 सितंबर 2026 तक इससे नया समेकित रेलवे दर-पत्र सार्वजनिक रूप से नहीं मिला। वार्षिक आमंत्रण/रेलवे बोर्ड/स्थानीय आदेश में बदलाव हो तो वही मान्य होगा। [स्रोत 3]

रेलवे की राजभाषा पुरस्कार एवं प्रोत्साहन योजनाएं
योजना राशि मुख्य शर्त/स्थिति
रेलवे बोर्ड व्यक्तिगत नकद पुरस्कार ₹3,000 + प्रशस्ति-पत्र मुख्यालय/मंडल/कारखाना से प्रतिवर्ष एक अधिकारी या कर्मचारी; अधिकारी केवल कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड तक; हिंदी कार्य की निर्धारित सीमा लागू। स्थिर ‘134 पुरस्कार’ संख्या हटाई गई।
क्षेत्रीय निबंध, वाक् तथा टिप्पण-प्रारूप प्रतियोगिता प्रथम ₹2,000; द्वितीय ₹1,600; तृतीय ₹1,200; 3 सांत्वना × ₹800 तीनों प्रतियोगिताओं पर समान दर; वार्षिक आमंत्रण की पात्रता लागू।
अखिल रेल निबंध, वाक् तथा टिप्पण-प्रारूप प्रतियोगिता प्रथम ₹5,000; द्वितीय ₹4,000; तृतीय ₹3,000; 5 प्रेरणा × ₹2,500 तीनों प्रतियोगिताओं पर समान दर; क्षेत्रीय चयन/वार्षिक आमंत्रण की शर्तें लागू।
रेल मंत्री हिंदी निबंध राजपत्रित: ₹6,000/₹4,000; अराजपत्रित: ₹6,000/₹4,000 कम-से-कम 3 माह की रेलवे सेवा; रेल प्रबंधन/संचालन विषय; अंतिम तिथि व शब्द-सीमा वार्षिक आमंत्रण से लें।
लाल बहादुर शास्त्री तकनीकी मौलिक लेखन ₹20,000 / ₹10,000 / ₹7,000 तकनीकी रेल विषय पर मौलिक हिंदी पुस्तक; वर्तमान आमंत्रण से लेखक-पात्रता/पुरस्कार संख्या जांचें।
प्रेमचंद पुरस्कार ₹20,000 / ₹10,000 / ₹7,000 कथा/कहानी/उपन्यास/गद्य-संग्रह; वर्तमान आमंत्रण की पात्रता लागू।
मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार ₹20,000 / ₹10,000 / ₹7,000 काव्य/गजल-संग्रह; वर्तमान आमंत्रण की पात्रता लागू।
रेल यात्रा-वृत्तांत ₹10,000 / ₹8,000 / ₹6,000; 5 प्रेरणा × ₹4,000 सभी भारतीय नागरिक; शब्द-सीमा/अंतिम तिथि वार्षिक आमंत्रण से लें।
मूल रूप से हिंदी में सरकारी कामकाज—भौतिक/इलेक्ट्रॉनिक 2 प्रथम × ₹5,000; 3 द्वितीय × ₹3,000; 5 तृतीय × ₹2,000 वित्त-वर्ष; ‘क/ख’ में 20,000 और ‘ग’ में 10,000 शब्द। 25-08-2025 से कंप्यूटर/ई-ऑफिस का मूल हिंदी कार्य स्पष्ट रूप से शामिल। [स्रोत 6]
हिंदी डिक्टेशन—रेलवे ₹5,000 प्रति चयनित श्रेणी आशुलिपिक-सुविधा वाले अधिकारी; हिंदी भाषी 20,000 और अहिंदी भाषी 10,000 शब्द/वर्ष।
अंग्रेजी में भर्ती आशुलिपिक/टंकक का हिंदी कार्य आशुलिपिक ₹240/माह; टंकक ₹160/माह औसतन 5 हिंदी मद/दिन या लगभग 300/तिमाही; नवीनतर रेलवे दर आदेश न मिलने के कारण ‘नवीनतम उपलब्ध दर’ के रूप में दें।
कमलापति त्रिपाठी राजभाषा स्वर्ण पदक स्वर्ण पदक + ₹10,000 एक पुरस्कार; वर्तमान रेलवे प्रक्रिया लागू।
रेल मंत्री राजभाषा रजत पदक रजत पदक + ₹8,000 30 पुरस्कार; वर्तमान रेलवे प्रक्रिया लागू।
अखिल रेल हिंदी नाट्योत्सव ₹5,000 / ₹4,000 / ₹3,000; प्रोत्साहन ₹2,000; 15 कलाकार × ₹1,000 क्रमशः प्रथम/द्वितीय/तृतीय/प्रोत्साहन; वार्षिक आयोजन-नियम लागू।
सामूहिक पुरस्कार 2026 दर सत्यापित नहीं पुरानी ₹12,000/₹8,000/₹6,000 दर जुलाई 2024 के NWR समेकित संकलन में नहीं है; इसलिए वर्तमान स्थानीय/रेलवे बोर्ड आदेश के बिना इसे प्रकाशित दर न मानें।

हिंदी प्रशिक्षण परीक्षाएं : संशोधित नकद पुरस्कार

नीचे की दरें 1 जुलाई 2025 से संशोधित हैं और 2026 प्रशिक्षण परिपत्रों में लागू हैं। निर्धारित पात्रता/श्रेणी की शर्तें अलग से पूरी करनी होंगी। [स्रोत 5]

हिंदी प्रशिक्षण परीक्षाओं की संशोधित नकद पुरस्कार दरें
परीक्षा निम्न बैंड मध्य बैंड उच्च बैंड
प्रबोध 55–<60%: ₹1,000 60–<70%: ₹2,000 ≥70%: ₹4,000
प्रवीण 55–<60%: ₹1,500 60–<70%: ₹3,000 ≥70%: ₹4,500
प्राज्ञ 55–<60%: ₹2,000 60–<70%: ₹4,000 ≥70%: ₹6,000
परांगत 55–<60%: ₹4,000 60–<70%: ₹7,000 ≥70%: ₹10,000
हिंदी शब्द-संसाधन/टंकण 90–<95%: ₹2,000 95–<97%: ₹4,000 ≥97%: ₹6,000
हिंदी आशुलिपि 88–<92%: ₹2,000 92–<95%: ₹4,000 ≥95%: ₹6,000

निजी प्रयत्न से परीक्षा पास करने पर पात्र एकमुश्त पुरस्कार: प्रबोध ₹3,500; प्रवीण ₹4,000; प्राज्ञ ₹6,000; हिंदी शब्द-संसाधन/टंकण ₹4,000; हिंदी आशुलिपि ₹7,500। टंकण परीक्षा व निर्धारित शर्तों पर 12 माह के लिए एक वेतनवृद्धि के बराबर वैयक्तिक वेतन; हिंदी आशुलिपि में अहिंदी मातृभाषा वाले पात्र आशुलिपिक के लिए लागू आदेशानुसार दो वेतनवृद्धियों के बराबर लाभ हो सकता है।

राजभाषा गौरव पुरस्कार : मार्च 2026 में संशोधित संरचना

9 मार्च 2026 के संशोधित संकल्प ने 22 जून 2023 की पुरानी संरचना को अधिक्रमित किया और इसे योजना-वर्ष 2025-26 से लागू किया। अगली योजना-वर्ष की विषय-सीमा, प्रकाशन अवधि और अंतिम तिथि उस आमंत्रण से लें। [स्रोत 4]

राजभाषा गौरव पुरस्कार की संशोधित संरचना
श्रेणी पुरस्कार राशि
1. विज्ञान/अभियांत्रिकी/आईटी/प्रबंधन/समसामयिक विषय ₹2,00,000; ₹1,25,000; ₹75,000; 3 प्रोत्साहन × ₹40,000
2. विधि/पुलिस अनुसंधान/फॉरेंसिक/अपराधशास्त्र/पुलिस प्रशासन ₹1,50,000; ₹1,00,000; 2 प्रोत्साहन × ₹40,000
3. संस्कृति/धर्म/कला/धरोहर ₹1,50,000; ₹1,00,000; 2 प्रोत्साहन × ₹40,000
4. क्षेत्र ‘ग’ के लेखक की उपर्युक्त विषयों पर मौलिक हिंदी पुस्तक ₹1,50,000; ₹1,00,000; 2 प्रोत्साहन × ₹40,000
5. कालजयी साहित्य तथा संस्कृति/कला/धरोहर का हिंदी अनुवाद ₹1,50,000; ₹1,00,000; 2 प्रोत्साहन × ₹40,000

मुख्य पात्रता: लेखक/सह-लेखक या अनुवादक/सह-अनुवादक भारतीय नागरिक हो; पुस्तक कम-से-कम 100 पृष्ठ और ISBN सहित हो। प्रकाशन-अवधि तथा क्षेत्र ‘ग’ लेखक की विशेष कसौटी वर्तमान आमंत्रण/संकल्प से जांचें।


डिजिटल राजभाषा उपकरण : 2026

  • यूनिकोड देवनागरी: यूनिकोड वर्ण-एन्कोडिंग मानक है, की-बोर्ड नहीं। वर्तमान OS में BIS Enhanced InScript (IS 16350:2016) या अनुमोदित ध्वन्यात्मक हिंदी की-बोर्ड जोड़ें; कार्यालय की आईटी/सुरक्षा नीति का पालन करें।
  • भारती बहुभाषी अनुवाद सारथी: राजभाषा विभाग का बहुभाषी अनुवाद सहायक। मशीन-अनुवाद को अंतिम मानने से पहले मानव समीक्षा करें।
  • हिंदी शब्द सिंधु 3.0: मानक शब्दावली और शब्द-संसाधन के लिए आधिकारिक संसाधन।
  • लीला: प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ और हिंदी प्रवाह के स्व-अध्ययन संसाधन।
  • ई-पत्रिका पुस्तकालय और ई-सरल हिंदी वाक्यकोश: राजभाषा सामग्री, पत्रिकाएं और सरल कार्यालयी वाक्य।
  • तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR) और संयुक्त नराकास वेबसाइट: अधिकृत रिपोर्टिंग/समन्वय के लिए संस्थागत प्रणालियां; केवल प्रदत्त कार्यालयी प्रवेशाधिकार से उपयोग करें।
  • विरासत कृतिदेव/गैर-यूनिकोड दस्तावेज: रूपांतरण के बाद नमूना-जांच करें; नाम, संख्याएं और संयुक्ताक्षर स्वतः सही मानकर प्रकाशित न करें।

आधिकारिक प्रवेश-बिंदु और नवीनतम लिंक राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। [स्रोत 7]

प्रमुख आधिकारिक स्रोत (1 सितंबर 2026 को सत्यापित)